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पीड़ा की तैयारी कर लो सुख का आमंत्रण आया है

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 ब्लॉग लिखना तकरीबन बंद ही कर चुका हूं। क्योंकि लिखने के लिए अब उत्साह नहीं रहा।अब मन जब व्याकुल होता है तभी यहां हाजिर होता हूं ‌ बीते हफ्ते में घटी दो घटनाओं ने मन को व्यथित कर रखा है।रोड एक्सीडेंट में 2 प्रियजनों की अकस्मात निधन ने जीवन में कभी भी कुछ भी अनापेक्षित घट सकता है।इस कठोर सत्य को उजागर कर दिया।दोनों के छोटे-छोटे बच्चों का करुण क्रंदन देख असहनीय पीड़ा हुई। जिंदगी एक ही पल में किस कदर बिखर जाती है ये पुनश्च देखने को मिला। पूर्व के ऐसे ही कटु अनुभवों ने जीवन को देखने के मेरे नजरिए को बदल कर रख दिया है। ईश्वर का विधान समझ से बाहर लगने लगा है। मैंने महसूस किया है कि जैसे ही किसी के जीवन में खुशियां आती है। कुछ समय के बाद कोई ना कोई दुर्घटना जरुर घट जाती है। फिर सारे परिवार को उससे उबरने में सालों लग जाते हैं। कुछ कमियां कभी भी नहीं भर सकती। कहते हैं कि मनुष्य कर्म बंधन से आबद्ध है। उसके जन्म की हर एक घटना का उसके पूर्व कर्मों से संबंध होता है। लेकिन कभी कभी कुछ समझ में नहीं आता।जिस बच्चे ने अनाथ के रूप में अपना जीवन संघर्षों से गुजर कर निकाला क्या उसके बच्चे को भी फि...