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कैसा रेल बनाया बनाने वाले...

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फोटो गूगल से साभार   बचपन के दिनों में जब रेडियो ही मनोरंजन का सर्वव्यापी साधन हुआ करता था,उन दिनों छत्तीसगढ़ के मशहूर गायक पंचराम मिर्झा का ये गीत खूब हमने खूब सुना था। जिसमें मनुष्य शरीर की नश्वरता और और भजन की महत्ता के बारे में बताया गया है। हमारी कक्षा चौथी के हिन्दी पाठ्य-पुस्तक में भी एक पाठ रेल के बारे में था।भारत में पहली रेलगाड़ी ठाणे से मुंबई के बीच चली थी ये अब तक मुंहजबानी याद है। रेल, शब्द से हम सब बचपन से परिचित हैं।रेलगाड़ी का खेल खेलकर ही हम सब बड़े हुए हैं। इंटरनेट पर रेल का शाब्दिक अर्थ खंगालने पर पता चला कि इसका मतलब बहाव,भाप के दबाव से चलने वाला वाहन और लोहपथगामिनी है।अर्थात लोहे के सड़क पर चलने वाला वाहन। रेल ( Rail ) परिवहन का एक ज़रिया है जिसमें यात्रियों और माल को पटरियों पर चलने वाले वाहनों पर एक स्थान से दुसरे स्थान ले जाया जाता है। पारम्परिक रूप से रेल वाहनों के नीचे पहियें होते हैं जो इस्पात (स्टील) की बनी दो पटरियों पर संतुलित रूप से चलते हैं, लेकिन आधुनिक काल में चुम्बकीय प्रभाव से पटरी के ऊपर लटककर चलने वाली 'मैगलेव' ( maglev ) और एक पटरी पर चलन...

स्वागत है 2022

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  लो भाई आ गए नये साल में!! उम्मीद करते हैं ये साल सफलता,स्वस्थता और समृद्धि देकर जाए।ऐसी ही कामना तो पिछले साल जनवरी महीने में भी किया था।पर मिला क्या? आप सब जानते हैं।बीता हुआ साल सुखद यादें कम, दुखद स्मृतियां ज्यादा देकर गया है।कोरोना की दूसरी लहर ने देश को झकझोर कर रख दिया। जिस बीमारी पर हम जोक्स बनाये उस बीमारी ने जब मार्च अप्रैल के महीने में अपना रौद्र रूप दिखाया तो हाहाकार मच गया।शमशान मुर्दों से भर गया।कितने ही लोग अपनों का अंतिम दरसन तक ना कर सके‌। जिस सांस को ईश्वर ने सबको मुफ्त में दिया है उसको लाखों रूपये में खरीदकर जीवन बचाने की जद्दोजहद करनी पडी। भगवान फिर कभी ऐसे दिन ना दिखाए। हमारे कितने ही अपनों को हमने पिछले साल खो दिया।कितने ही बच्चों के सर से मां बाप का साया उठ गया।पिछले साल के नाम पर कड़वी यादें ही शेष रह गई है।हालांकि कोरोनाकाल के उस कठिन घड़ी में लोग जात धरम भूलकर सिर्फ इंसान थे, ये महत्वपूर्ण बात है। सरकारी तंत्र ने हरसंभव प्रयास लोगों का जीवन बचाने के लिए किया।जिस चरमराती स्वास्थ्य सेवा के लिए हम लोग शासन को कोसते हैं, उसी ने आम आदमी के प्राणों की रक्षा किय...