संदेश

मई 3, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गोरस, गोरसी और गोरोचन

चित्र
  गौमाता के सीरीज में ये मेरा तीसरा ब्लॉग है। पिछले ब्लॉग को मात्र 10-15 लोगों ने ही पढ़ा। मुझे इस पर ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि जब लोगों को गौमाता और गौपालन में ही रुचि नहीं है तो गौ पर लिखे ब्लॉग को पढ़ने में क्या ही रुचि लेंगे। ये ब्लॉग मैं सिर्फ आप लोगों के ज्ञानवर्धन के लिए लिख रहा हूं ताकि आपको पता चले कि गौमाता से संबद्ध चीजें आपकी जिंदगी से कैसे जुड़ी है। क्या आपको पता है कि ग्रामीण अंचलों में दूध को आज भी गोरस कहा जाता है। इसमें ये भेद नहीं रखा जाता कि दूध किस पशु का है? अपितु मां के छाती से निकले दूध को भी गोरस ही कहा जाता है। गोरस से ही जुड़ा एक मिट्टी के पात्र का नाम है गोरसी।जो छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड के दिनों में सिगड़ी की तरह हाथों को सेंकने के लिए और छोटे बच्चों को मालिश करने के बाद सेंकने के लिए उपयोग किया जाता है।ये गोरसी का अन्य उपयोग है। मूलतः गोरसी गोरस यानि दूध को गोबर के कंडे पर धीमी-धीमी आंच में पकाने का पात्र है। मतलब ऐसा पात्र जिसमें गोरस पकता है। आप लोगों में से बहुतायत लोगों को पता होगा कि किसी विशिष्ट प्रकार के मृग के नाभि में एक बहु...