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सितंबर 20, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दईहान...एक लुप्त होती परंपरा

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  छत्तीसगढ़ में गौ-पालन की समृद्ध परंपरा रही है।पहले गांवों में प्राय:प्राय: हर घर में गाय रखी जाती थी और घर में अनिवार्यतः कोठा(गौशाला)भी हुआ करती थी।अब घर से गौशाला गायब है और गौशाला के स्थान पर गाड़ी रखने का शेड बना मिलता है; जहां गाय की जगह मोटरसाइकिल या कार खड़ी होती है।    गांवों में पशुओं को चराने के लिए बरदिहा(चरवाहा या ग्वाला)रखा जाता है।गांव वाले उनको सालभर के लिए इस कार्य के लिए नियुक्त करते हैं और पशुओं की संख्या के आधार पर मेहनताना अनाज के रूप में देते है। छत्तीसगढ़ धान का कटोरा कहा जाता है तो पहले भी उनको धान दिया जाता था और आज भी धान ही दिया जाता है। गांवों में पशु चराने का कार्य प्राय: यदुवंशी ही करते हैैं।जो बड़े सवेरे हांक पारकर(उंची आवाज लगाकर) पशुओं को चराने के लिए गौशाला से खोलने का संदेश देते हैं।फिर गली से गौठान तक पशुओं को पहुंचाने का क्रम चल पड़ता है।कुछ अनूठे नियम भी देखने को मिलता है गांवों में।जैसे गांवों में दूध दुहने के लिए लगे चरवाहे(ग्वाले) को हर तीन या चार दिन के बाद पूरा दूध ले जाने का अधिकार होता है।इसे बरवाही कहा जाता है। सामान्यतः गाय ...

कचनाधुरवा गाथा-5

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 मेरे खयाल से ये वीर कचनाधुरवा कड़ी का पांचवां और अंतिम भाग होना चाहिए,पर आगे कोई और नई जानकारी प्राप्त हुई तो इस गाथा की और अगली कड़ी आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।इस गाथा के लिए नई  जानकारी जुटाने के लिए मैंने गूगल को इतनी बार खंगाला है कि अब जैसे ही मैं कचनाधुरवा टाईप करता हूं।बारीक से बारीक जानकारी गूगल बाबा मुझे सौंप देता है और कहता है ले मेरे बाप!!मेरे पास जो है वो देख ले,और अपने मतलब की चीज ले ले।ऐसा हाल हो गया है।इसी खोजबीन के दौरान मुझे ब्रिटिश मानवशास्त्री वैरियर एल्विन लिखित किताब का एक वेब पेज मिला। इसमें मुझे फिर से एक नई कहानी मिली।किताब का नाम है"जनजातीय मिथक-उडिया आदिवासियों की कहानियां"। इस किताब के अंश में कमार कहानी अंतर्गत धुरवा राजा का जिक्र आया है।धुरवा राजा मतलब कचना धुरवा। इसमें उन्होंने इतिहासज्ञ रसेल और हीरालाल के हवाले से बताया है कि कमार गोंड जनजाति की ही एक उपजाति है और वीर कचनाधुरवा भी उसी वंश से थे।इस संबंध में एक कहानी है कि किसी समय बहुत से कमारों ने मिलकर एक बार भीमराज नामक पक्षी को मार दिया।वह पक्षी दिल्ली से आए किसी विदेशी नागरि...

इतिहास यात्रा...बिंद्रानवागढ जमींदारी

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बीता हुआ समय मतलब इतिहास!!! जिसमें छुपा होता है ढेरों रहस्यमय कहानियां,किस्से,अतीत का वैभव और जानकारियां।मेरा मानना है कि इतिहास भविष्य के लिए धरोहर होता है,जो सदैव मार्गदर्शन और सीख देती है। इतिहास और कला संस्कृति की बातें मुझे सदैव आकृष्ट करती रही है। वर्तमान के साथ साथ मुझे पुरानी यादों के गलियारों में घूमना कुछ ज्यादा ही पसंद है।लाकडाउन के इस समय ने मुझे पर्याप्त समय दिया है इतिहास में विचरण करने का;और मैं अकेला कहां घूम रहा हूं??संग संग आप सबको भी तो घुमा रहा हूं। बचपन में मैंने स्कूली किताबों में भारतीय इतिहास को कभी शौक से,कभी अनमने ढंग से तो कभी सिर्फ परीक्षा पास करने के उद्देश्य से पढ़ा है।अब जबकि जिंदगी का आधा हिस्सा गुजर चुका है,अपने स्थानीय इतिहास के बारे में भी जानने की ललक बढ़ गई है।पर अफसोस!जो जानकार थे वो रहे नहीं,जिनसे जानकारी की उम्मीद रखो वो रूचि नहीं लेते और एक बड़ी संख्या तो एक लाईन में कुछ भी चर्चा से मना करने वालों की है।लेकिन कहते हैं ना कि सच्चे मन से किया गया प्रयास कभी निष्फल नहीं होता,सो कोशिश रंग लाती है और कामयाबी कदम चूमती है, बशर्ते आप थके नहीं।आप प्रयास...

कचनाधुरवा...एक अमर प्रेमगाथा-4

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नमस्कार मित्रों!कुछ दिनों पहले मैंने नवागढ के राजा और अंचल के प्रसिद्ध देव वीर कचनाधुरवा पर तीन पोस्ट में कहानी लिखी थी। जिसमें पहले पोस्ट के बाद बाकि पोस्ट में पाठकों के रूचि मुझे कम नजर आई इसलिए मैंने उस गाथा के क्रम को और आगे बढ़ने पर रोक लगा दी। लेकिन कुछ पाठक मित्रों ने वाट्सएप के माध्यम से बताया कि वो वीर कचनाधुरवा की प्रेमगाथा के बारे में भी जानने के लिए इच्छुक हैं। इसलिए उस क्रम को फिर से जारी करना पड़ा।इस प्रेमगाथा की सत्यता पर मुझे व्यक्तिगत रूप से संदेह है क्योंकि मैं कचनाधुरवा को एक संपूर्ण व्यक्तित्व मानता हूं क्योंकि लोकमान्यताएं और अंचल में स्थापित कचना धुरवा की प्रतिमाएं इसकी पुष्टि करते हैं। लेकिन कुछ लोगों का ये मानना है कि धुरवा नवागढ़ के राजा थे और कचना जिसे कहीं कहीं कचनार भी उल्लेखित करते हैं वह धर्मतराई(वर्तमान धमतरी)नरेश की पुत्री थी।इन दोनों के बीच प्रेम का प्रस्फुटन ही कहानी का आधार है। प्रेम कहानी की भरमार है हमारे देश में;और देश में ही क्यों पूरी दुनिया में प्रेमियों और प्रेम कहानियों की भरमार है।रोमियो जूलियट, लैला-मजनूं,शीरी-फरहाद,हीर-रांझा,सोहनी-महिवाल,लो...

आनलाईन पढाई

 मार्च के महीने से स्कूल कालेज बंद हैं।ऐन परीक्षा के समय कलमुही कोरोना आई और बच्चों के पढ़ाई पर पानी फेर गई। खुशकिस्मती से प्राय:प्राय: बोर्ड एग्जाम का समापन हो गया था।कुछेक परीक्षाएं जो बाकी रह गई थी उनको निरस्त करना पड़ा।लोकल परीक्षाओं को स्थगित करते हुए सीधे कक्षोन्नति दे दी गई।इस प्रकार से सत्र का समापन हुआ।  इसके बाद बच्चों को अध्ययन से जोड़े रखने के लिए अनेक जतन किए जाने लगे।चूंकि आज तकनीक का जमाना है इसलिए अध्ययन अध्यापन के कार्यक्रम को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए आनलाईन कक्षा आयोजित करने की शुरुआत हुई। जिसमें लैपटाप, कंम्प्यूटर और स्मार्ट फोन जैसे माध्यमों से पढ़ाई-लिखाई जारी रखने की कवायद शुरू हुई। बच्चों और शिक्षकों का मोबाइल नंबर आदि का संग्रहण किया गया और उनको आनलाइन गतिविधि से जोड़ने का प्रयास प्रारंभ हुआ। शिक्षकों को सर्वप्रथम जूम नामक विडियो कान्फ्रेसिंग एप डाउनलोड करने के लिए आदेशित किया गया। धड़ाधड़ आदेश की तामीली कराई गई।ये प्रक्रिया चल ही रही थी कि अखबारों में जूम एप के ख़तरें सुर्खियां बनने लगे।इस एप के बारे में बताया गया क...