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अगस्त 23, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संवेदनहीनता

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 पिछले कुछ दिनों से व्यस्तता इतनी अधिक रही की चाहकर भी कुछ नहीं लिख पाया।पर आज समाचार पत्र में छपे एक खबर ने तमाम व्यस्तता के बाद भी लिखने के लिए मजबूर कर दिया।खबर महासमुंद जिले से है जहां संसदीय सचिव की मौजूदगी में कोरोना वारियर्स का सम्मान कार्यक्रम आयोजित था और कार्यक्रम चल रहा था जबकि उसी जगह से कुछ दूरी पर एक मां अपने बच्चे की लाश को ले जाने के लिए तड़प रही थी,आंसू बहा रही थी। समाचार पत्र के खबर मुताबिक महासमुंद जिले अंतर्गत स्थित कछारडीह नाम के गांव से एक बच्चे को जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए लाया गया था।उस बच्चे की जान एक झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के कारण गई थी।मां पोस्टमार्टम के लिए इंतजार कर रही थी ताकि वो अपने जिगर के टुकड़े की लाश को ले जा सके पर सरकारी आयोजन के चलते डाक्टरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। समाचार पत्र के खबर अनुसार पुलिस का कहना था कि पंचनामा जल्दी हो गया था जबकि डाक्टरों का कहना था कि पंचनामा में देरी की वजह से पोस्टमार्टम नहीं हो पाया।अब कौन सच्चा है और कौन झूठा ये तो  ईश्वर जानेगा।इस सच्चाई को समाचार पत्र तक लाने के लिए उस पत्रकार को मेरा नमन जो स...