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ईद और नन्हें हामिद की यादें...

आज ईद है। मुस्लिम भाईयों का सबसे बडा त्योहार।पर बचपन के कुछ वर्षों तक मुझे इसके बारे में कुछ भी पता नहीं था।तब हमारे लिए रक्षाबंधन,होली, दशहरा,दीवाली और कुछ स्थानीय त्योहार ही त्योहार हुआ करते थे। हालांकि एक दो मुस्लिम परिवार हमारे गांव मे भी हुआ करते थे पर वो त्योहार मनाने नजदीक के कस्बे मे जाते थे तो उनके त्योहार का कुछ भी त्योहार जैसा नहीं लगता था।    हमारी बाल मति अनुसार जब उन लोगों के घर मे खाट के पाए से बांधकर सेवईयां बनाई जाती थी तब समझ मे आ जाता था कि उनका त्योहार करीब  है।और जिस दिन वे लोग नए कपडे पहनते थे,हमारे घर मे सेवई की कटोरी आती थी और हमारे स्कूल मे छुट्टी होती थी तब हमें मालूम पडता था कि आज उनका त्योहार है। वैसे ईद से और हामिद से मेरा पहला परिचय हमारी भाषा की किताब मे कक्षा तीन मे हुआ था। ईदगाह कहानी से। हामिद... एक छोटा सा बच्चा जो उस समय तकरीबन हमारे जित्ते ही रहा होगा।पर उसकी सोच एक जिम्मेदार आदमी से भी बडी थी।बालमन लालची होता है।अपने सामर्थ्य के अंदर और बाहर कि सभी चीजों को पाने के लिए लालायित होता है।किंतु हामिद एक बैरागी संत की तरह मोहमाया से विर...