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सितंबर 13, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दहशत

 कोरोना के बारे में पहला समाचार मैंने दिसंबर माह में टीवी न्यूज में देखा था। जिसमें बताया जा रहा था कि कोई नये किस्म का वायरस चीन के वुहान शहर में तबाही मचा रही है।जिसके कारण से वहां वायुयान सेवा बंद की जा रही थी।तब बिल्कुल भी ये अंदेशा नहीं था कि वुहान शहर से निकली ये चिंगारी दावानल में बदलकर समूचे विश्व को राख करने के लिए चल पड़ेगी।जिसकी आंच अब हमको अपने आसपास भी महसूस हो रही है। मार्च महीने में जब ऐतिहातन स्कूलों को बंद किया गया तब महसूस हुआ कि ये बीमारी महानगरों तक तबाही मचायेगी।फिर देश में लाकडाऊन लगाने का क्रम चला तब तक देश के बड़े महानगर चपेट में आ चुके थे।फिर भी लगा कि हम सुरक्षित हैं। फिलहाल हमारे राज्य में कोई केस नहीं है।अप्रेल के आते-आते हमारा ये भ्रम भी जाता रहा।तब इक्के दुक्के केस आने लगे थे।लेकिन जैसे ही लाकडाऊन के कारण अन्य राज्यों में फंसे मजदूरों को और विदेश तथा देश के अन्य हिस्सों में फंसे विद्यार्थियों को घर लाने का कार्य शुरू हुआ।मानो कोरोना का कहर शुरू हो गया।अपने घरों में सुरक्षित बैठकर चाय की चुस्कियां लेकर समाचार देखने वाले लोग मजदूरों को कोरोना का वाहक समझ...

हालात कुछ ऐसे हैं...

 पिछले तीन पोस्ट वीर कचनाधुरवा पर आधारित थे। इसमें मिली जुली प्रतिक्रिया मिली।लेकिन पाठक संख्या के हिसाब से इतना तो समझ आ गया कि लोगों को अपने गौरवशाली इतिहास में कोई विशेष रूचि नहीं है। इसलिए उस वीरगाथा पर विराम लगाता हूं। लोगों की पुरानी बातों में अरूचि देखकर लगता है कि इतिहास एक विषय के रूप में स्कूल और कालेज की किताब तक ही ठीक है।वैसे लोगों की रूचि तो वर्तमान की ज्वलंत समस्याओं पर भी नहीं हैं।लोगों में संवेदना खतम होती जा रही है।आज के जमाने में तो यही देखने में आता है कि कोई बाजू में भूखा मरता रहे, उससे कोई मतलब मत रखो।आपके पास सामर्थ्य है,पैसा है तो लात मारो दुनिया को और ऐश करो।किसी की मदद के नाम पर लोग ऐसे बिदकते हैं जैसे फिलहाल किसी कोरोना पाजेटीव आदमी को देखकर बिदकते हैं।वैसे इस कोरोना नामक दुश्मन ने गरीबों का जीना हराम कर रखा है।ऊपर से महंगाई की मार अलग। दिनभर में सौ डेढ़ सौ की दिहाड़ी कमाने वाला मजदूर अस्सी रू किलो टमाटर और सवा सौ रुपए किलो की दाल खाने की हिम्मत कैसे करेगा?ऊपर से ऐसे हालात के मारे लोग बुरी संगत का शिकार होकर नशे की लत में बर्बाद होते हैं सो अलग। कोरोनाकाल...