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मार्च 8, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तुलसी नर का क्या बडा... समय बड़ा बलवान

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 समय कभी किसी को क्षमा नहीं करता।वह अवसर देता है लेकिन कर्म की परिणति भविष्य में क्या होगा वह कर्ता के विवेक आधारित कर्म पर छोड़ देता है।द्वापर युग का एक प्रसंग है। महाभारत के भीषण रक्तपात के बाद जब कुरुक्षेत्र की भूमि शांत हुई, तो एक नए विनाश की पटकथा लिखी जा रही थी। गांधारी का कृष्ण को दिए शाप और ऋषियों का कोप यदुवंश पर वज्र बनकर गिरा। देखते ही देखते, प्रभास क्षेत्र की धरती अपनों के ही रक्त से लाल हो गई। द्वारका का वैभव, जो कभी देवताओं के लिए भी ईर्ष्या का विषय था, अब डूबने की कगार पर था। भगवान श्रीकृष्ण ने जान लिया था कि धरा पर उनका अवतार कार्य पूर्ण हो चुका है। देह त्यागने से पूर्व उन्होंने संदेश भेजकर अपने प्रिय सखा अर्जुन को द्वारका बुलाया। जब अर्जुन वहां पहुँचे, तो द्वारका की गलियों में उत्सव की जगह मातम का सन्नाटा था। श्रीकृष्ण जा चुके थे, बलराम ने समाधि ले ली थी और द्वारका के वृद्ध पिता वसुदेव ने भी प्राण त्याग दिए थे। अपने भौतिक शरीर को नश्वर जानकर लीलाधर ने अर्जुन को बुलाया। श्रीकृष्ण का अंतिम निर्देश स्पष्ट था: "अर्जुन, द्वारका अब समुद्र में समा जाएगी। यहाँ की स्त्रियो...

पनवाड़ी की दुकान

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  आज सभ्य असभ्य शिक्षित अशिक्षित सबके हाथों में मोबाइल है। लाखों वेब न्यूज पोर्टल है जिससे सब समाचार त्वरित रूप से मिल जाता है। लेकिन साल 2000 से पहले तक मामला अलग था।टीवी समाचार, आकाशवाणी समाचार और अखबार के बाद समाचार प्राप्ति का चौथा स्थान था पान की दुकान।पान की दुकान को गांव कस्बे में प्रायः पान ठेला कहा जाता था।ठेले का मालिक गांव कस्बे की मशहूर शख्सियत हुआ करती थी।पान के दुकान इनके व्यक्तिगत नाम या जाति के नाम से चला करती थी।भले ही दुकान में उनके बच्चे ही क्यों ना बैठे हों। बाबूलाल पान ठेला, गोपाल पान ठेला,साहू पान ठेला... अमुक अमुक आदि इत्यादि।पान ठेले पर कुछ हो ना हो पर एक जलती हुई छोटी लैंप और आईना जरुर होता था।जलती हुई छोटी लैंप पर सिगरेट के डिब्बे की कतरन जलाकर धुम्रपान प्रेमी अपना बीड़ी या सिगरेट जलाते थे और आईना देखकर अपने बाल संवारते थे।ठेलेवाले छोटी लैंप दिनभर जलाते थे जो कि उनका माचिस का खर्च बचाते थे।ग्राहक दिनभर माचिस मांगते तो ठेलेवालों का दिवाला निकल जाता।सवा रु लीटर की भाव में मिलने वाली घासलेट 15 पैसे में मिलने वाले माचिस डिब्बी की बनिस्बत ज्यादा किफायती था। ज्य...