छुरा दशहरा की यादें
मेरे पिछले ब्लॉग को बहुत से पाठकों ने पसंद किया। क्रिकेट आयोजन की पुरानी यादों ने सबको अतीत के गलियारों में फिर से घूमा दिया।आज ऐसी ही एक और यादगार आयोजन की स्मृति ताजा करने की कोशिश कर रहा हूं।छुरा दशहरे की यादें... छत्तीसगढ़ में बस्तर दशहरे के बाद फिंगेश्वर और खरियार रोड की दशहरे को भव्य माना जाता है।संयोग से मैं अभी तक तीनों दशहरा आयोजन में शामिल नहीं हुआ हूं। मेरे स्मृति पटल में निज ग्राम के बाद सिर्फ छुरा दशहरे की छवि अंकित है।छुरा दशहरा भी एक जमाने में बहुत बढ़िया हुआ करता था।वैसे तो छुरा राजघराने द्वारा रावण की सीमेंट की मूर्ति बहुत पहले से बनाई जा चुकी थी लेकिन उन दिनों उस मूर्ति के पास रावण वध नहीं किया जाता था। दशहरे के दिन रावण का विशाल पुतला वर्तमान थाने की दीवाल से सटे हुए जगह पर बस स्टैंड के पास बनाया जाता था। वहीं रावण दहन होता था।अभी की स्थिति में उस जगह पर नगर पंचायत का काम्प्लेक्स खड़ा है। रात को खाने के बाद दादाजी के कंधे पर बैठकर दादी के साथ दशहरा देखने जाया करता था।छुरा में दशहरा विजयादशमी के दिन नहीं बल्कि एक दो दिन बाद होता था।कारण क्या था? मुझे नहीं ...