गोरस, गोरसी और गोरोचन

 


गौमाता के सीरीज में ये मेरा तीसरा ब्लॉग है। पिछले ब्लॉग को मात्र 10-15 लोगों ने ही पढ़ा। मुझे इस पर ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि जब लोगों को गौमाता और गौपालन में ही रुचि नहीं है तो गौ पर लिखे ब्लॉग को पढ़ने में क्या ही रुचि लेंगे।

ये ब्लॉग मैं सिर्फ आप लोगों के ज्ञानवर्धन के लिए लिख रहा हूं ताकि आपको पता चले कि गौमाता से संबद्ध चीजें आपकी जिंदगी से कैसे जुड़ी है।

क्या आपको पता है कि ग्रामीण अंचलों में दूध को आज भी गोरस कहा जाता है। इसमें ये भेद नहीं रखा जाता कि दूध किस पशु का है? अपितु मां के छाती से निकले दूध को भी गोरस ही कहा जाता है।

गोरस से ही जुड़ा एक मिट्टी के पात्र का नाम है गोरसी।जो छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में ठंड के दिनों में सिगड़ी की तरह हाथों को सेंकने के लिए और छोटे बच्चों को मालिश करने के बाद सेंकने के लिए उपयोग किया जाता है।ये गोरसी का अन्य उपयोग है। मूलतः गोरसी गोरस यानि दूध को गोबर के कंडे पर धीमी-धीमी आंच में पकाने का पात्र है। मतलब ऐसा पात्र जिसमें गोरस पकता है।

आप लोगों में से बहुतायत लोगों को पता होगा कि किसी विशिष्ट प्रकार के मृग के नाभि में एक बहुत सुगंधित पदार्थ मिलता है जिसे कस्तूरी कहा जाता है।आप लोगों में से बहुतों को जानकर आश्चर्य होगा कि गाय के पित्ताशय में भी एक विशिष्ट सुगंधित द्रव्य मिलता है जिसे गोरोचन कहा जाता है।कुछ लोगों का ये भी मानना है कि गोरोचन गाय के कंठ में पाया जाता है। लेकिन वैज्ञानिक आधार पर बताया जाता है कि गोरोचन वस्तुत: लाल पीले रंग का एक प्रकार का पथरी है जो किसी किसी गाय के पित्ताशय में पाया जाता है।

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि हर गाय के पित्ताशय में गोरोचन मिले।किसी किसी गाय में ही ऐसा संभव हो पाता है। ग्रामीण बुजुर्ग गोरोचन वाली गाय के पहचान के संबंध में बताते हैं कि जिस गाय में गोरोचन होता है उसे गर्मी बहुत लगती है और वह गाय बार बार जलाशय में जाकर आकंठ डूबती है।

वैसे गोरोचन का प्रयोग तांत्रिक क्रियाओं में होता है।पुराने जमाने में वशीकरण एवं गडा़ धन निकालने के लिए इसका प्रयोग किया जाता था।यह बहुत महंगा मिलता है।एक बात और भगवान श्री हरि के निवास बैकुंठ धाम को गोलोक भी कहा जाता है। स्वयं जगन्नाथ नारायण ने जिसे इतना महत्व दिया है दुर्भाग्यवश हम उसे महत्वहीन समझ बैठे हैं।

उम्मीद है आपको ये ब्लॉग पसंद आया होगा।अगर आया है तो गौ माता के प्रति थोड़ा ध्यान अवश्य दे....

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