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जून 28, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

लाली बंगला

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छत्तीसगढ़ जनजाति बाहुल्य राज्य है। सन् 2011 के जनसंख्या आंकड़ों के मुताबिक राज्य के कुल जनसंख्या में एक तिहाई जनसंख्या जनजातियों की है।हमारे प्रदेश में कुल 42 जनजातियां पाई जाती है।जिनकी अपनी विशिष्ट जीवनशैली और रहन-सहन है।वन संपदा से भरपूर छत्तीसगढ़ में सीधे सरल स्वभाव वाले विभिन्न जनजाति समूह छत्तीसगढ़ महतारी के कोरा में आदिकाल से निवासरत हैं। दुनिया की रेलमपेल से दूर सुदूर वन प्रांतर में निवासरत होती है अधिकांश जनजातियां।दिखावे और ढकोसला से दूर प्रकृति के सामिप्य के संग अपने में मगन।इस भागदौड़ की जिंदगी में बड़े बड़े पैसेवालों के पास भी बंगला नहीं हैं ऐसे में न्यूनतम जरूरत के साथ अपनी गुजर-बसर करने वाले किसी जनजातिय समूह के पास आप बंगला की कल्पना कर सकते हैं।शायद बिल्कुल भी नहीं!!! लेकिन आप मानें या ना मानें प्रकृतिपुत्रों के पास भी होता है उनका बंगला...लाली बंगला।    बंगला शब्द सुनने से ही किसी विशाल अट्टालिका का बोध होता है और सामान्यतः ऐसे भवनों के लिए ही बंगला शब्द का प्रयोग किया जाता है।बंगले आमतौर पर आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्तियों के पास ही होता है।जैसे हमारे फि...

बचपन का सिनेमा.....

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  फुरसत के पल में पुरानी यादों की जुगाली करने में मुझे बड़ा आनंद आता हैऔर अक्सर मैं अपने बचपन की पुरानी यादों में खो जाता हूं।ये वर्चुअल मतलब आभासी दुनिया में खोने से ज्यादा अच्छा है जो स्मार्ट फोन के हाथ में आते ही हमें वास्तविक दुनिया से बेखबर कर देती है।हम अपनी मोबाइल पर आंखें गड़ाए अपने में मगन और आजू बाजू क्या हो रहा है उसकी कोई खबर ही नहीं।किसी समय पर अमीर खुसरो ने बातूनी स्त्रियों के गपबाजी में व्यस्तता को लेकर एक पंक्ति कही थी-खीर बनाई जतन से ,चरखा दिया चलाय।आया कुत्ता खा गया,तू बैठी ढोल बजाय। आज अगर अमीर खुसरो होते तो शायद पंक्तियां यूं होती-खीर बनाई जतन से, मोबाइल दिया चलाय।आया कुत्ता खा गया,तू बैठी नजर गड़ाय।    कुल जमा मतलब ये है कि आज मोबाइल ने सबको जकड़ रखा है और सभी उसके आगे पीछे घूम रहे हैं। उनमें मैं भी शामिल हूं।कभी कभी फुरसत निकालकर पुरानी यादों पर जमी धूल भी झाडनी चाहिए।जैसे वक्त बेवक्त मैं करते रहता हूं।आज मुझे बात करनी है बचपन वाली सिनेमा पर।मतलब विडियो और वीसीपी के जमाने की बातें।वीसीपी नब्बे के दशक की एक जादुई चीज होती थी जिसका इंतजार बच्चे ब...

टीकटाक गाथा...

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जब से हमारे देश में इंटरनेट की सुविधा का विस्तार हुआ और स्मार्ट फोन आम आदमी के बजट में आया तब से सोशल मीडिया नाम के एक लत का प्रवेश भारतीय जनमानस में हुआ। प्रारंभिक दौर में फेसबुक का आगमन हुआ और देश के एक छोटे से गांव में रहने वाले आम आदमी की पहुंच वैश्विक स्तर पर हुई और अंतर्राष्ट्रीय मित्रता की शुरुआत हुई। फेसबुक के बदौलत जिनका पड़ोस में भी दोस्त नहीं था उनकी दोस्ती दुनिया भर के लोगों से होने लगी।फिर आया वाट्सएप...ये भी फेसबुक का अनुगामी था और आगे चलकर फेसबुक के अधिकार क्षेत्र अंतर्गत आ ही गया।फिर आया सबसे प्रलंयकारी एप...टीकटाक।जिसने भारत में धूम मचा दिया।इस एप के बदौलत एक से बढ़कर एक छुपे रूस्तम कलाकार निकलकर बाहर आए।टीकटाक के कारण ही एक से बढकर एक डांसर,सिंगर, आर्टिस्ट और बहुमुखी प्रतिभा के धनी लोगों का अभ्युदय हुआ।   वैसे टीकटाक का जन्म हमारे पड़ोसी देश चीन में हुआ और उसका सबसे बेहतर पालन-पोषण हमारे यहां हुआ।शंघाई के दो युवा मित्रों ने मिलकर मनोरंजन के उद्देश्य से इस अद्भुत और अलौकिक एप्प का निर्माण किया। शुरूआती दौर में इसका नाम Musically था जिसे एक प्रसिद्ध चीनी कंपनी ...