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सितंबर 29, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हरि बोलो....जय जगन्नाथ!!!

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 एक लंबी और नानस्टाप यात्रा से थकान स्वाभाविक थी।रात भर का रात्रि जागरण भी हुआ था तो धाम में पहुंचने के बाद जल्दी से कोई ठहरने की जगह खोजने कार्यक्रम था। तीर्थ क्षेत्र में धर्मशाला,यात्री लाॅज और होटलों की कमी नहीं होती।इन विकल्पों का विचार करने के बजाय पूर्व अनुभवियों के मतानुसार होटल में ठहरना तय हुआ और वो भी समुद्र के किनारे। हालांकि समुद्री बीच के किनारे के होटल थोड़े महंगे होते हैं  बताए लेकिन समुद्र में स्नान पश्चात सादे पानी से स्नान करने की सुविधा को देखते हुए वहीं ठहरना ज्यादा उचित लगा।अब हमारी गाड़ी गोल्डन बीच की ओर दौड़ पड़ी। गोल्डन बीच का नजारा अद्भुत था चारों तरफ दुकान समुद्री उत्पाद बेचने वालों की भीड़ और लोगों का जमावड़ा। मैं पहली बार सागर के दर्शन कर रहा था। इसलिए उतरते ही थोड़ी देर खड़ा होकर दृश्य को निहारने लगा।चार सदस्य होटल ढूंढने निकल पड़े और घनश्याम भाई गाड़ी को किनारे कर वहीं खड़े रहे। बमुश्किल 2 मिनट नजारों का दर्शन करके लौटा तब तक एक कर्तव्यनिष्ठ ट्रैफिक आफिसर हमारी गाड़ी की फोटो खींच रहा था।पता चला वहां बीच के किनारे गाड़ी खड़ी करने की अनुमति नहीं है।...

रात का सफर

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 जैसा कि मैंने पिछले पोस्ट में बताया था कि छत्तीसगढ़ से निकलते निकलते ही शाम ढलने लगा था। लगभग सवा 7 बजे के आसपास हम लोग खरियार रोड पहुंचे।खरियार रोड छत्तीसगढ़ और ओड़िशा दोनों के लिए महत्वपूर्ण कस्बा है। यहां दोनों जगहों से लोग खरीददारी करने आते हैं।कभी खरियाररोड अविभाजित दक्षिण कौसल का हिस्सा रहा है।जब सिरपुर दक्षिण कौसल कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की राजधानी थी तब खरियार, नुआपड़ा  और कालाहांडी का क्षेत्र छत्तीसगढ़ में  समाहित था। वर्तमान में अब ये सारे ओडिशा राज्य के अंतर्गत आते है। यहां हमारी छत्तीसगढ़ी बोली और समझी जाती है। हालांकि उनकी स्थानीय मातृभाषा ओडिया का भी यहां चलन है। शासकीय प्रक्रिया भले ही दो प्रांतों में सीमा निर्धारण कर देती है, लेकिन सांस्कृतिक मेल मिलाप उनको जोड़े रहती है। यहां की दशहरा विख्यात है। छत्तीसगढ़ के बड़े बड़े लोककला मंचों का उस दिन यहां प्रदर्शन होता है। रामलीला होती है।रावण दहन में खूब आतिशबाजी होती है। जैसा कि आपको ज्ञात है यात्रा के शुरुआत में निकलते ही हमारी गाड़ी पंचर हो गई थी इसलिए उसकी मरम्मत कराना जरुरी था।खरियार रोड पहुंचते ही सर्वप्रथ...