चंदैनी गोंदा....आधी सदी का सफर
चंदैनी गोंदा,एक छोटा सा खुशबूदार और सदाबहार पुष्प जो आमतौर गांवों में सहज रूप से कुएं के पास या बाड़ी में मिल जाया करती है।इसके छोटे-छोटे लाल पीले रंगत लिए फूल बड़ी मात्रा में छोटे-से पौधे मे खिलते हैं,जो सामान्यत: देव-पूजा में प्रयुक्त होते हैं।चंदैनी मतलब चांदनी।जिस प्रकार आकाश में एक साथ अनगिनत चांदनी दिखाई पड़ते हैं,उसी प्रकार चंदैनी गोंदा के नन्हें पौधे पर भी अनगिनत फूल खिलते हैं। चंदैनी गोंदा का सौंदर्य देखते ही बनता है।नाम अनुरूप छत्तीसगढ़ का प्रतिष्ठित सदाबहार लोक सांस्कृतिक मंच है"चंदैनी-गोंदा"।दाऊ रामचंद्र देशमुख द्वारा रोपित और आदरणीय खुमान लाल साव जी के श्रम से सिंचित"चंदैनी-गोंदा"समय की मार से आज तक कुम्हलाया नहीं है।यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ में राजनीतिक और सांस्कृतिक जागरण का शंखनाद था। मुझे याद है साल 2002 में हमारे निकटतम कस्बे छुरा में दशहरे के अवसर पर"चंदैनी-गोंदा"का कार्यक्रम आया था।तब मुझे इस संस्था के बारे में ना तो कोई जानकारी थी और ना ही मुझे लोकमंच के कार्यक्रम में विशेष रूचि थी।सोचा था कि रावण दहन के पश्चात एकाध घंटे कार्यक्रम देखक...