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अगस्त 30, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

किस्सा मेरे गांव का

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    भारत गांवों का देश कहा जाता है।देश की कुल आबादी का तिहाई हिस्सा गांवों में ही निवास करता है।देश की कला, संस्कृति और परम्पराओं का जतन भी गांव में ही होता है।गांव हैं तो खेत है, कुआं है,तालाब हैं,किसान हैं और किस्से कहानियां भी है। छत्तीसगढ़ अंचल के ओनहा कोनहा(मतलब सभी हिस्सों) में लोककथा की भरमार है।जरूरत है अपने आनेवाली पीढ़ियों के लिए उसको सहेज कर रखने कि ताकि उन्हें अपने इतिहास का स्मरण रहे और ये किस्से कहानियां जीवनपथ पर उनका मार्गदर्शन करता रहे।बहुत दिनों से मैं अपने क्षेत्र के वीर कचनाधुरवा महराज के किस्से कहानियां इकट्ठा करने के प्रयास में हूं।कुछ सफलता भी मिली है,पर अभी और खोज जारी है।     फिलहाल मैं अपने गांव के नामकरण से संबंधित जनश्रुति और ग्राम की आराध्य देवी टेंगनही माता के चमत्कार के बारे में बताउंगा,जो मुझे ग्राम के कुछ वरिष्ठ जनों के मुख से सुनकर ज्ञात हुआ है। दरअसल मेरे गांव का नाम माता टेंगनही के नाम से जुडकर बना है। हमारे गांव से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित पहाड़ी में माता टेंगनही का दरबार है।इस माता के चमत्कार की घटनाएं आस-पास के गांव मे...

मधुशाला

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  आज एक बोर्ड लिखने के सिलसिले में एक अति व्यस्ततम मार्ग वाले रोड में जाना हुआ। उस रोड में एक नया भोजनालय खुला था उसका नाम वगैरह लिखना था। पहुंचकर मैंने अपना रंगों का पिटारा खोला और अपने काम में रम गया।कुछ देर बाद एक सज्जन आए और पूछा-आज मंदिर बंद है क्या? मैंने उसका मंतव्य समझकर हां में सर हिलाया।यही प्रश्न तीन घंटों के दरम्यान चार पांच लोगों ने पूछा और मैं सहमति में सर हिलाता रहा।  दरअसल आज लोग जिस मंदिर के बारे में पूछ रहे थे वो कोई पूजास्थल नहीं बल्कि शराब दुकान था। आम बोलचाल की भाषा में हमारी तरफ मदिरालय को सम्मान स्वरूप मंदिर कहा जाता है।वैसे इसके अनेक नाम हैं जैसे-दारूभट्ठी, शराबखाना,ठेका और साहित्यिक नाम मधुशाला।आज मोहर्रम के कारण दारू भट्ठी बंद थी और भक्तजन भटक रहे थे।कुछ बंदे तो अन्य वैकल्पिक माध्यमों का पता भी पूछ रहे थे पर मैं इस मामले में निरा गंवार हूं तो उन लोगों को मैंने निराश करने वाला जवाब दिया और वे चले गए।  हमारा छत्तीसगढ़ राज्य धन-धान्य और प्राकृतिक संपदा से संपन्न राज्य है और हम छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया!!अपनी सरलता को हम कभी कभी और कहीं कहीं घमंड के स...