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सितंबर 6, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कचना धुरवा गाथा-3

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 वीर कचना धुरवा गाथा की ये तीसरी कड़ी है जो जनश्रुति पर आधारित है।इस क्रम की पिछले दोनों पोस्ट को मेरे पाठक मित्रों ने सराहा है।मुझे खुशी इस बात की ज्यादा है कि आडियो वीडियो के इस दौर में मैं कुछ लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित कर पा रहा हूं।किसी जननायक को देवता की उपाधि तब मिलती है,जब वह अपना सर्वस्व जनकल्याण के लिए न्यौछावर कर देता है।जरूर वीर कचनाधुरवा में बुद्धि,बल औल त्याग का गुण कूट-कूट कर भरा रहा होगा।  जनश्रुतियां वाचिक हुआ करती है,इसका ऐतिहासिक संदर्भ के साथ तालमेल बिठा पाना संभव प्रतीत नहीं होता है।प्रस्तुत कहानी में वीर कचना धुरवा को प्राप्त अलौकिक शक्ति और उसके बुद्धि बल का परिचय मिलता है। बताते हैं कि जब कचना धुरवा राजा नहीं बना था और एक सामान्य युवक था तब वह कृषि आदि का काम भी करता था।एक दिन जब वह हल जोत रहा था तब उसकी मां उसके लिए खाना लेकर गई।कचना धुरवा जब भोजन करने के लिए एक बांस पेड़ के नीचे बैठा तभी बांस पेड़ में लगे बांदा(अमरबेल की तरह परजीवी पौधा)से थोड़ा सा रस कचना धुरवा के लिए लाए सब्जी पर गिरा।उस दिन उसकी मां उसके लिए मछली पकाकर लाई थी।उस सब्जी में रस गिर...

कचना धुरवा गाथा-2

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 समय किसी के लिए नहीं रूका है।किसी घटना या जानकारी को अगर लिपिबद्ध न किया जाए तो वह समयधारा में विलीन हो जाती है। बहुत सी घटनाएं लिपिबद्ध ना होने के कारण मात्र जनश्रुति बनकर रह जाती है जबकि उनका ऐतिहासिक आधार होता है।जैसा कि मैंने वीर कचनाधुरवा की गाथा वाली पिछले पोस्ट में बताया था कि उनके बारे में ऐतिहासिक जानकारी का अभाव है। फिर मैंने उनसे संबंधित ऐतिहासिक तथ्यों को खंगालना शुरू किया।काम आया फिर वही गुगल गुरु,जिसने कुछ विद्वानों के लेख आदि को संभालकर रखा है। दरअसल कचना धुरवा की गाथा प्राचीन दक्षिण कौशल से जुड़ी है जब ओडिशा और महाराष्ट्र का कुछ भाग भी छत्तीसगढ़ में समाहित था।  श्रीराजिमलोचनमहात्म्य के अनुसार जिस रमईदेव नाम के राजा का जिक्र हुआ है वो वास्तव में हुए हैं, और बलांगिरपटना नामक स्थान भी है,जो वास्तव में पटनागढ नामक रियासत था,जिसके अंतर्गत बलांगीर भी आता था।वर्तमान में बलांगीर ओडिशा का एक जिला मुख्यालय है और पटनागढ एक विधानसभा क्षेत्र है।ठीक वैसे ही जैसे कभी बिन्द्रानवागढ़ रियासत के अंतर्गत गरियाबंद की गिनती सबसे बडे गांव के रूप में होती थी जबकि वर्तमान में गरियाबंद...

कचना धुरवा गाथा-1

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   छत्तीसगढ़ की धरती वीरों की धरती है। यहां पर अनेक राजाओं ने अपने शौर्य,दयालुता और बलिदान की एक छाप छोड़ी है।ऐसे ही एक पराक्रमी वीर थे कचना धुरवा जो नवागढ़ के राजा थे।मुझे कचना धुरवा की गाथा में बहुत दिनों से रूचि थी और उनके संबंध में हरसंभव जानकारी जुटाने का प्रयास मेरी ओर से जारी है।बचपन में बुजुर्गों के मुख से उनकी कहानी सुनने को मिला करती थी,तब समझ नहीं थी।अब जब समझ आई तो उनके बारे में बताने वाले नहीं रहे।थक हारकर गुगल गुरू के शरण में गया तो वहां पर भी कुछ जानकारियां और यूट्यूब में मंदिर के विडियो के अलावा कुछ भी नहीं मिला। आसपास से जानकारियां जुटाना चाहा तो बहुत से लोगो ने रुचि नहीं लिया और बहुत लोगों ने सीधे ही अनभिज्ञता जता दी।इस पडताल और झिकझिक के बाद भी मेरी मेहनत थोड़ी बहुत सफल हुई और कुछ लिखने लायक सामग्री हाथ लगी।इस वीर के बारे में अभी भी प्रमाणिक जानकारी का अभाव है।उनके वंशज भी ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं। सिर्फ जनश्रुति और किंवदंतियां ही वीर कचना धुरवा की गाथा का आधार है। कचना धुरवा के बारे में ही विरोधाभास है।कुछ किस्से कहानियों में कचनाधुरवा को एक राजा माना ग...