मेरा गम कितना कम है...
क्या आपको कभी लगा है कि दुनिया की तमाम परेशानियों को मै झेल रहा हूं।कभी महसूस किया है कि दुनिया में सबसे परेशान आदमी मैं हूं।मेरे अलावा पूरा संसार सुखी है।काश ऐसा होता तो मुझे खुशी मिलती या ऐसा नहीं होता तो सब बढ़िया होता। दुनिया जहान की सारी तकलीफें ईश्वर ने मेरे पल्ले बांध रखी है। शायद आप सबने कभी ना कभी ये महसूस किया होगा या कर रहे होंगे। मैं भी कभी कभी ऐसा ही कुछ महसूस करता हूं।पर क्या ये सच है?क्या आप दुनिया के सबसे दुखी आदमी हैं?क्या सचमुच आपके साथ ईश्वर ने न्याय नहीं किया? मेरा मानना है कि ये बिल्कुल भी सच नहीं है।हमारा दुख तब तक हमारे लिए बहुत बड़ा होता है जब तक हम अपने से बड़ी तकलीफ़ झेलने वाले के बारे में नहीं जानते या नहीं देखते हैं। जैसा ही हम अपने से भारी मुसीबत के मारों से मिलते हैं।हमारी तकलीफ हमें छोटी लगने लगती है।एक से एक बड़े बड़े मुसीबत के मारे अनगिनत लोग हमारे आस-पास ही मौजूद होते हैं।कभी कभी बात निकल आने पर ही हमें लोगों की परेशानियों का पता चलता है। नहीं तो हर आदमी अपनी दुखों की गठरी लेकर घूम रहा होता है। ऐसा ही एक कहानी मैंने कहीं पढ़ा था।एक बार एक आदमी अपन...