खल्ल वाटिका में
खल्लारी माता प्राकट्य स्थल पर प्रवेश द्वार डोंगा पथरा पहाड़ी सौंदर्य भीम चूल्हा भीम पांव मां गंगा का आवाहन करते शिव जी पुराने मार्ग की सीढ़ियां भारत के पौराणिक ग्रंथ महाभारत का एक पात्र है महाबली भीम। छत्तीसगढ़ की चिन्हारी और संस्कृति की संवाहक लोकविधा "पंडवानी" का नायक भी भीम है।भीम का परिचय देने की आवश्यकता नहीं है।जिस प्रकार कृष्ण का संबंध वृंदावन,राम का अयोध्या, विक्रमादित्य का धारानगरी उज्जैन से है उसी प्रकार कुंती पुत्र भीम का संबंध भीमखोज से है।भीमखोज अर्थात महाभारत में वर्णित खल्ल वाटिका जो कालांतर में खल्लारी हो गया। ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के स्थलों से भरपूर महासमुंद जिले का एक गांव है भीमखोज जहां माता खल्लारी विराजित हैं और महाभारत कालीन घटनाओं का साक्ष्य आज भी मौजूद है। जैसा कि नाम से ही विदित होता है कि इस स्थान का संबंध पांच पांडवों में से एक भीम से है। महाभारत के गाथानुसार जब पांडवों को वनवास मिला था तब वे वन-वन भटकते यहां पहुंचे थे।यह क्षेत्र उस समय राक्षसराज हिडिम्बासुर का क्षेत्र माना जाता था।वह अपनी बहन हिडिम्बा(हिरबिची कैना)के साथ रहता था।जब पांडव यहा...