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कैसा रेल बनाया बनाने वाले...

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फोटो गूगल से साभार   बचपन के दिनों में जब रेडियो ही मनोरंजन का सर्वव्यापी साधन हुआ करता था,उन दिनों छत्तीसगढ़ के मशहूर गायक पंचराम मिर्झा का ये गीत खूब हमने खूब सुना था। जिसमें मनुष्य शरीर की नश्वरता और और भजन की महत्ता के बारे में बताया गया है। हमारी कक्षा चौथी के हिन्दी पाठ्य-पुस्तक में भी एक पाठ रेल के बारे में था।भारत में पहली रेलगाड़ी ठाणे से मुंबई के बीच चली थी ये अब तक मुंहजबानी याद है। रेल, शब्द से हम सब बचपन से परिचित हैं।रेलगाड़ी का खेल खेलकर ही हम सब बड़े हुए हैं। इंटरनेट पर रेल का शाब्दिक अर्थ खंगालने पर पता चला कि इसका मतलब बहाव,भाप के दबाव से चलने वाला वाहन और लोहपथगामिनी है।अर्थात लोहे के सड़क पर चलने वाला वाहन। रेल ( Rail ) परिवहन का एक ज़रिया है जिसमें यात्रियों और माल को पटरियों पर चलने वाले वाहनों पर एक स्थान से दुसरे स्थान ले जाया जाता है। पारम्परिक रूप से रेल वाहनों के नीचे पहियें होते हैं जो इस्पात (स्टील) की बनी दो पटरियों पर संतुलित रूप से चलते हैं, लेकिन आधुनिक काल में चुम्बकीय प्रभाव से पटरी के ऊपर लटककर चलने वाली 'मैगलेव' ( maglev ) और एक पटरी पर चलन...