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चढ़ता सूरज धीरे-धीरे ढलता है ढल जायेगा

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आप सबको कभी कभी महसूस नहीं होता कि ये पूरी दुनिया मैं.. मैं..मैं.... चिल्लाने वालोें से भरी पड़ी हैं।आपने क्या सोचा? हम किसकी बात कर रहे हैं....बकरी की!!! जी नहीं; हम यहां बकरियों की बात नहीं कर रहे हैं।हम बात कर रहे हैं उन लोगों की, जिनको ये भ्रम है कि दुनिया उनके भरोसे चल रही है।वो नहीं रहेंगे तो दुनिया डगमगाने लगेगा। ऐसा सोचने वाले लोग!! मैंने ये किया,मैंने वो किया, मैं ये जानता हूं, मैं वो जानता हूं,मुझे ये चीज आती है, मैं सब जानता हूं कहने वाले।याने मैं ही मैं का रट्टा मारने वाले आत्ममुग्ध इंसान। वैसे ऐसे लोगों को ढूंढने के लिए ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है।हम सबके आसपास ही ऐसे लोग बेहिसाब तादाद में अगल-बगल में खड़े मिलते हैं।हमारे धार्मिक ग्रंथों में बताया भी गया है कि इंसान मिट्टी से बना है और अंत में मिट्टी में ही मिल जायेगा। छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा पर ये मानता कौन है? समझता कौन है? धार्मिक ग्रंथ पढ़ने का टाईम किसके पास है? कम से कम आज की पीढ़ी के पास तो बिल्कुल नहीं हैं। तमाम सुख सुविधाओं से लैस आज की पीढ़ी आईफोन,सोशल मीडिया, आनलाईन गेमिंग और उल्लू जै...

ड्रामे की किताब

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 आज एक किताब की दुकान में जाना हुआ। पिछले साल से स्कूल कालेज बंद चल रहे हैंं। पर बच्चों की परीक्षा आयोजित होना तय है, इसलिए गाईड और प्रश्न बैंक वगैरह सजाके दुकानदार बैठा था।दुकानदार परिचित था इसलिए थोड़ी देर तक इधर-उधर की बातें होती रही।तभी मेरी नजर कुछ पुरानी पतली से पुस्तकों पर पड़ी।समय के मार से धूल खाते पड़ी थी।शायद सालों से उन पतली पुस्तकों की माॅंग नहीं थी। मैंने उन पुस्तकों पर पड़ी धूल झाड़कर देखा तो समझ में आया कि ये किताबें तो नाटकों की हैं,जो पहले गांवों के रंगमंचों पर खेला जाता था। तब का जमाना भी क्या जमाना था? मनोरंजन के विशेष साधन ना थे। विशेष अवसरों पर ही नाचा या अन्य मंचीय कार्यक्रमों का संयोग बनता था।अक्सर दशहरे के अवसर पर रामलीला होता था।और अन्य अवसर के लिए ड्रामा की मंचीय प्रस्तुति होती थी। जिनमें सामान्यतः सामाजिक विषयों का फिल्मी टच के साथ मसालेदार कहानी हुआ करती थी।डाकू,सती,दहेज और रामायण तथा महाभारत के विभिन्न प्रसंगों के नाटक हुआ करते थे। नाटकों के शीर्षक भी दिलचस्प होते थे।जैसे-राखी के दिन, इंसाफ की आवाज,लहू की सौगंध,गरीब का बेटा,जयद्रथ वध,राजा हरिश्चंद्र,की...