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हमारे बापू

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 मोहनदास करमचंद गांधी;नाटे कद का एक ऐसा विराट व्यक्तित्व जिसके आगे बड़े से बड़े व्यक्ति का कद भी बौना साबित होता था।एक ऐसा करिश्माई शख्सियत जिसने पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ाया और सत्य की ताकत का एहसास कराया।पूरा भारतवर्ष उनको महात्मा,बापू और राष्ट्रपिता के संबोधन से संबोधित करता है।उनके व्यक्तित्व से समूचा विश्व प्रभावित रहा है। आज के युवाओं के चहेते आईफोन बनाने वाली कंपनी "एप्पल"के संस्थापक स्टीव जॉब्स गांधी जी के मुरीद थे।वे उनके सम्मान में उनके जैसे ही गोल फ्रेम का चश्मा पहनते थे। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा किसी मृत व्यक्ति से मुलाकात का अवसर मिलने के प्रश्न पर उनसे मिलने की इच्छा जताते हैं।दलाई लामा, नेल्सन मंडेला समेत अनेक हस्तियां उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हैं। अहिंसा के इस पुजारी के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन् 2007 में उनकी जयंती को विश्व अहिंसा दिवस घोषित किया।सबसे बड़ी बात ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री रहे जिस विंस्टन चर्चिल ने गांधी जी को 'अधनंगा फकीर' कहा था उसी चर्चिल के प्रतिमा के बगल में 4 मार्च 2015 को लंदन के पार्लियामेंट ...

फिल्मी पोस्टर

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 पिछले दिनों हिंदी फिल्म जगत के पोस्टर डिजाइन करने वाले महान कलाकार दिवाकर करकरे जी का निधन हो गया।एक ऐसे कलाकार जिसकी कूची ने अमिताभ को एंग्रीयंगमैन के रूप में पोस्टर के द्वारा प्रतिष्ठित किया।जिनके रंग संयोजन में उनकी भावनाओं को स्पष्टतया समझा जा सकता था। फिल्मों के लिए पोस्टर बनाने की शुरुआत तो भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के ने ही करी थी। उन्होंने अपनी पहली फिल्म"राजा हरिश्चंद्र" के पोस्टर भी स्वयं बनाये थे और कलाकारों के नाम को अपने हाथों से लिखा था।बाद में बाबूराव पेंटर जैसे कलाकारों ने पोस्टर कला को ऊंचाईयां प्रदान की। पश्चिम के देशों की तरह हमारे यहां चीजें संग्रहित करने की परंपरा में विशेष रुचि ना होने के कारण पोस्टर संग्रह का काम सिनेमा के शुरुआती दिनों में नहीं हुआ।बाद के वर्षों में लोगों ने पोस्टर संग्रहण शुरू किया और नोट छापे।बताया जाता है कि शाहरुख खान ने फिल्म मुगल-ए-आजम के हस्तनिर्मित पोस्टर को अच्छा खासा दाम देकर खरीदा था।  मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन साहब ने भी हिंदी फिल्मों के पोस्टर डिजाइन किए थे।इसके अलावा अपने अलग डायलॉग डिलीवरी के लिए मशहूर अभिनेता ...

छत्तीसगढ़ में मितानी परंपरा

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मित्रता का सभी मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है।किसी व्यक्ति के मित्रों के व्यक्तित्व से ही संबंधित व्यक्ति के व्यक्तित्व का अंदाजा सहज रूप से लगाया जा सकता है।सरल शब्दों में कहा जाये तो दो मित्र एक दूसरे का प्रतिबिंब होते हैं।ये एक ऐसा नाता होता है जिनमें रक्त संबंध नहीं होता पर ये उससे बढ़कर होता है। हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी राम-सुग्रीव,राम-विभिषण, कृष्ण-सुदामा,कृष्ण-अर्जुन,दुर्योधन-कर्ण जैसे मित्रों का वर्णन मिलता है।मुंशी प्रेमचंद के साहित्य में भी मित्रता ने स्थान पाया है।चाहे वह इंसान से इंसान की मित्रता हो जानवर की। छत्तीसगढ़ में भी मित्रता के नाते को महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है।हमारे यहां मितान बदने की परंपरा है।मतलब किसी धार्मिक आस्था से जुड़ी वस्तुओं का साक्षी रखकर जीवन भर के लिए मित्र (मितान/मितानिन)बनाया जाता है।मितान बदने वाले दो परिवार जीवनपर्यंत इस संबंध का निर्वहन करते हैं।महापरसाद, गंगाजल,गंगाबारू,गजामूंग,भोजली,जंवारा,तुलसीदल,रैनी,दौनापान,गोबरधन आदि मितान बदने के संबोधन है।मितान बदने के बाद मितान/मितानिन का नाम नहीं लिया जाता बल्कि उसे उपरोक्त संबोधन ...

उम्मीदें 2021

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  त्रासदी भरा साल 2020 अपनी दुखद स्मृतियों के साथ विदा हुआ और साल 2021 ने दस्तक दे दी है।उम्मीद करते हैं कि नया साल सबके लिए मंगलकारी होगा।वैसे हर नये साल के मंगलकारी होने की कामना तो हम हर बदलते कैलेंडर के साथ करते हैं,पर साल का अच्छा या बुरा होना हमारे बस में नहीं होता।अपना सोचा कब होता है?वो जब सोचे तब होता है। वो मतलब ऊपर नीली छतरी वाला मालिक।सबका सृजनकर्ता, पालनहार,जगतनियंता ईश्वर। इंसान को ऊपरवाले ने ही बनाया है लेकिन नश्वर धन-दौलत और संपत्ति के मोह में फंसा माटी का पुतला जब कुदरत को ललकारने का दुस्साहस करता है तब उसका हश्र बहुत बुरा होता है। वैसे पिछले साल की महामारी ने अब तक पीछा नहीं छोड़ा है। वैज्ञानिकों की मानें तो कोरोना नाम का दैत्य अब अपडेटेड होकर अधिक घातक होकर लोगों की जान लेने पर आमादा है। भारत जैसे बड़ी जनसंख्या वाले देश में अल्प सुविधाओं के बावजूद कोरोना जैसी महामारी का नियंत्रण काबिले तारीफ है।इसके लिए भारत की सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार की पीठ थपथपाई जा सकती है।जिस देश में कभी पीपीई किट नहीं बनती थी,वो देश अपने दृढ़ संकल्प से पीपीई किट के उत्पादन में विश्...

अलविदा 2020

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अंततः साल 2020 का सफर खत्म हुआ..! गजब का साल रहा बीता साल!!जिसने गजब ढाया था।ये ऐसा साल साबित हुआ जिसके समापन के लिए लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। आखिर हो भी क्यों ना? ज्यादातर लोगों के लिए साल 2020 मुसीबतें लेकर ही आया था।ये साल इतिहास में कोरोना महामारी के कारण सदा सदा के लिए ऐतिहासिक हो गया।इस साल की कड़वी यादें लोगों के जेहन में हमेशा रहेगी। चीन में जन्मी कोरोना नाम की महामारी ने साल 2020 में पूरी ‌दुनिया को नचा दिया।इटली और अमेरिका जैसे देशों को नाकों चने चबाने मजबूर कर दिया।सभी छोटे बड़े देशों की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो गई। भारत में मार्च महीने में स्कूलों को बंद कर दिया गया और लाकडाऊन का एक लंबा दौर चला।बेबस मजदूरों को घर वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ा।कई लोगों की जान घर वापसी की जद्दोजहद में चली गई।कोरोना की दहशत ने लोगों के सामाजिक जीवन को तहस-नहस कर दिया।सामूहिक आयोजन रद्द करने पड़े।इस कोरोना ने ये साबित कर दिया कि आप चाहे कितने ही प्लान बनाकर रख लो कुदरत उसको पलभर में मटियामेट कर सकती है।इस कोरोना ने लोगों को जीने का ढंग भी सिखाया। लाकडाऊन के दौरान लोगों ने न्यूनतम आवश्य...

खल्ल वाटिका में

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  खल्लारी माता प्राकट्य स्थल पर  प्रवेश द्वार डोंगा पथरा पहाड़ी सौंदर्य भीम चूल्हा भीम पांव मां गंगा का आवाहन करते शिव जी पुराने मार्ग की सीढ़ियां भारत के पौराणिक ग्रंथ महाभारत का एक पात्र है महाबली भीम। छत्तीसगढ़ की चिन्हारी और संस्कृति की संवाहक लोकविधा "पंडवानी" का नायक भी भीम है।भीम का परिचय देने की आवश्यकता नहीं है।जिस प्रकार कृष्ण का संबंध वृंदावन,राम का अयोध्या, विक्रमादित्य का धारानगरी उज्जैन से है उसी प्रकार कुंती पुत्र भीम का संबंध भीमखोज से है।भीमखोज अर्थात महाभारत में वर्णित खल्ल वाटिका जो कालांतर में खल्लारी हो गया। ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व के स्थलों से भरपूर महासमुंद जिले का एक गांव है भीमखोज जहां माता खल्लारी विराजित हैं और महाभारत कालीन घटनाओं का साक्ष्य आज भी मौजूद है। जैसा कि नाम से ही विदित होता है कि इस स्थान का संबंध पांच पांडवों में से एक भीम से है। महाभारत के गाथानुसार जब पांडवों को वनवास मिला था तब वे वन-वन भटकते यहां पहुंचे थे।यह क्षेत्र उस समय राक्षसराज हिडिम्बासुर का क्षेत्र माना जाता था।वह अपनी बहन हिडिम्बा(हिरबिची कैना)के साथ रहता था।जब पांडव यहा...

माता चंपई दर्शन

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सुरंग मार्ग बेंदरा कछेरी पहाड़ी से दृश्य जंगली वनस्पति का सौंदर्य   माता चंपई और खल्लारी छत्तीसगढ़ का कोना-कोना प्राकृतिक सौंदर्य से भरा पड़ा है।पग-पग पर कहानियां बिखरी पड़ी है।हम चाहे कितने भी आगे बढ़ जायें पर अतीत से हमारा नाता कभी नहीं टूट सकता।हर नई कहानी में पिछली कहानी का हिस्सा जरुर जुड़ा होता है। कभी-कभी अनायास ही कहीं जाने का कार्यक्रम बन जाता है और वहां मेरे मतलब की चीजें मिल जाए तो फिर क्या कहने? घरेलू काम से आज जिला मुख्यालय महासमुंद से लगभग 14 किमी दूर स्थित मोंहदी ग्राम आने का कार्यक्रम बना तो माता चंपई के दर्शन लाभ का भी मौका मिला। उंची पहाड़ी पर स्थित सुरंग में माता चंपई अपनी बहन माता खल्लारी के संग विराजमान हैं।सुरंग पूर्णतः प्राकृतिक है।सिर्फ चलने के लिए नीचे की ऊबड़-खाबड़ पथरीली जमीन पर सीमेंट का कार्य कराया गया है। चढ़ाई दुर्गम नहीं है।सुरंग तक पहुंचने के लिए पत्थर और सीमेंट से निर्मित पक्की सीढ़ी का निर्माण किया जा चुका है। आस-पास के चार गांव मोंहदी,तरपोंगी,अरंड और बेलर गांव के ग्रामीणों की माता चंपई पर अगाध श्रद्धा है।माता के नवरात्र पर्व पर कार्यक्रमों का संच...